बाँदा-बाल्मीकि जयंती पर कविताओं के माध्यम से कवियों ने मचाई धूम

कविताओं के माध्यम से कवियों ने की शानदार प्रस्तुति

UP TIMES NEWS- महर्षि बाल्मीकि जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा इंदिरा नगर में जिलाध्यक्ष रामप्रताप शुक्ला मानस किंकर की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का संचालन आर सी योगा ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ रमेश कुमार त्रिपाठी,विशिष्ट अतिथि केवल प्रसाद द्विवेदी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में ठाकुरदास शर्मा पंछी तथा डॉ भानु प्रताप सिंह एवं राम प्रसाद बियोगी आदि कवियों द्वारा सरस्वती माता एवं (आदि कवि महर्षि बाल्मीकि ) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी का चंदन वंदन करते हुए, पुष्पांजलि अर्पित की।अध्यक्ष रामप्रताप शुक्ला मुख्य अतिथि एवं उपस्थित कवियों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया,तत्पश्चात सरस्वती वंदना डॉ भानु प्रताप सिंह ने करते हुए महर्षि बाल्मीकि को शत-शत नमन मेरा,कविता पढ़ी गई,ठाकुरदास शर्मा पंछी ने समुद्र मंथन हो चुका,मनमंथन शेष है,रामप्रसाद वियोगी ने आवाज दो हम एक हैं। डॉ रमेश कुमार त्रिपाठी ने जीवन बीता जाए,राजेंद्र तिवारी स्वदेश ने साधु संत से मिले तो वाल्मीकि हो गए,ज्योति विश्वकर्मा ने रंग केसरी छाया तथा बाल कवि कुमारी अमोहा ने एक थे राजा राम सुनकर सभी का मनमोहा। कवि केवल प्रसाद द्विवेदी ने गुलाब के फूल उद्यान में खिलखिलाते हैं। गोपाल दास शर्मा गुप्त साथी ने दे दी हमें रामायण,बिना कपट बिना जाल। धर्मपाल सिंह सेंगर ने समाज में बढ़ रही दहेज की बीमारी,कमल सिंह कमल ने आदि कवि की जीवनी पर प्रकाश डाला।अमरपाल सिंह ने झलकियां प्रस्तुत की। आर सी योगा ने हल चलाता हूं कलम से,स्याही से बोता हूं बीच/ अनगिनत रातें बो देता बो देता त्योहार और तीज,रचना पढ़ी। मानस किंकर ने राम को आम अपने को खास समझते हैं उनका अंत रावण की तरह होता है,कविता के माध्यम से शानदार प्रस्तुति की।

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