डेढ़ घंटे के सफल ऑपरेशन के बाद खतरे से बाहर, आर्थिक स्थिति देखते हुए शुल्क भी माफ
बांदा। जिले से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मानसिक रूप से अस्वस्थ और दिव्यांग 10 वर्षीय बच्ची के मूत्राशय (पेशाब की थैली) से 40 एमएम की बड़ी पथरी निकालकर डॉक्टरों की टीम ने उसे नया जीवन दिया।
बबेरू क्षेत्र की रहने वाली शिवानी (10 वर्ष), पिता जय प्रकाश, पिछले कई दिनों से असहनीय दर्द से जूझ रही थी। मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अपनी तकलीफ स्पष्ट रूप से बता नहीं पा रही थी, लेकिन लगातार रोने और बेचैनी से परिजन चिंतित थे।

बच्ची के बाबा अर्जुन ने बताया कि उन्होंने कई स्थानों पर इलाज कराया, लेकिन राहत नहीं मिली। अंततः उसे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में दिखाया गया, जहाँ सर्जन डॉ. अनूप कुमार सिंह ने गंभीरता को समझते हुए तत्काल भर्ती कर आवश्यक जांच कराई।
जांच रिपोर्ट में मूत्राशय में 40 एमएम की बड़ी पथरी पाई गई। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने लगभग डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक पथरी निकाल दी। ऑपरेशन के बाद बच्ची की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और वह अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

आर्थिक स्थिति को देखते हुए शुल्क माफ
परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एस. के. कौशल ने सरकारी शुल्क माफ कर दिया, जिससे परिजनों को बड़ी राहत मिली।
इस सफल शल्यक्रिया में डॉ. अनूप कुमार सिंह के साथ डॉ. श्रेया तथा एनेस्थीसिया टीम से डॉ. प्रिया दीक्षित एवं उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिले उपचार से उनकी बच्ची को नया जीवन मिला है।
