₹9 लाख करोड़ के बजट में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों को 10–11% हिस्सेदारी का अनुमान, e-KCC के तहत ₹3 लाख करोड़ कृषि ऋण लक्ष्य
बांदा। उत्तर प्रदेश सरकार के हालिया बजट 2026–27 में कृषि क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। बजट में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, कृषि अवसंरचना के विकास, फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि पर विशेष जोर दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा ने बजट का विश्लेषण करते हुए बताया कि राज्य का कुल बजट आकार लगभग ₹9 लाख करोड़ से अधिक है, जो पिछले वर्ष 2025–26 के ₹8.08 लाख करोड़ की तुलना में लगभग ₹1 लाख करोड़ की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

डॉ. पुष्पा के अनुसार कृषि, सिंचाई, पशुपालन, डेयरी एवं ग्रामीण विकास को मिलाकर कुल बजट का लगभग 10–11% हिस्सा निर्धारित किया गया है। सिंचाई एवं जल संसाधन क्षेत्र में लगभग ₹20 हजार करोड़ से अधिक के प्रावधान का संकेत वर्षा पर निर्भरता कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
गन्ना क्षेत्र में सहकारी चीनी मिलों के आधुनिकीकरण के लिए ₹260 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं e-KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से ₹3 लाख करोड़ कृषि ऋण लक्ष्य डिजिटल और त्वरित वित्तीय सहायता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक दृष्टि से कृषि अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर और अधिक स्पष्ट एवं सशक्त निवेश की आवश्यकता है। उन्नत बीज, डिजिटल कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूल तकनीकों के विकास में कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बजट का झुकाव अवसंरचना सुदृढ़ीकरण और आय विविधीकरण की ओर स्पष्ट दिखाई देता है। ग्रामीण सड़कें, वेयरहाउस और मंडी सुधार किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य उपलब्ध कराने में सहायक होंगे। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र छोटे किसानों के लिए नियमित आय का स्रोत बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का मत है कि यह बजट कृषि को “सहारा” देता है, लेकिन “उछाल” तब मिलेगा जब अनुसंधान, तकनीक और किसान-केंद्रित बाजार सुधारों को और अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। संतुलित और ज्ञान-आधारित निवेश से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को टिकाऊ समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
