ओडीओपी योजना के तहत 25 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 10 से 25 प्रतिशत सब्सिडी, होटल-रेस्टोरेंट व मिठाई कारोबारियों को मिलेगा लाभ
बांदा। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती बांदा के पारंपरिक व्यंजनों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी ‘एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी)’ योजना के तहत जिले की प्रसिद्ध बालूशाही और सोहन हलुआ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार की नई पहल से स्थानीय कारोबारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
योजना के तहत बालूशाही और सोहन हलुआ से जुड़े उद्यमियों को प्रतिष्ठान स्थापित करने, विस्तार करने अथवा आधुनिकीकरण के लिए 25 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 10 से 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी (सब्सिडी) प्रदान की जाएगी। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य छोटे व्यापारियों, कुटीर उद्योगों और बड़े निर्माताओं को आधुनिक तकनीक अपनाने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस योजना का लाभ जिले के होटल, रेस्टोरेंट, हाईवे ढाबों, मिठाई की दुकानों और पारंपरिक मिठाइयों का निर्माण करने वाले सभी छोटे-बड़े उद्यमियों को मिलेगा। जो कारोबारी अपने प्रतिष्ठानों का सुंदरीकरण करना चाहते हैं या आधुनिक मशीनों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना विशेष रूप से लाभकारी साबित होगी। जिला प्रशासन ने पात्र लाभार्थियों को ऋण और सब्सिडी का लाभ समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्ययोजना भी तैयार कर ली है।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे बांदा के पारंपरिक स्वाद और स्थानीय उद्योग को नई पहचान दिलाने वाला कदम बताया है। उनका मानना है कि इस योजना से जिले के मिठाई उद्योग को नई गति मिलेगी, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत होगी और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सरकार की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि बांदा की पहचान केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बालूशाही और सोहन हलुआ जैसे पारंपरिक व्यंजन भी राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान स्थापित करेंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ बुंदेलखंड के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
